पात्र : नाना पाटेकर - भीष्म पितामह.
लकवाग्रस्त - ध्रितराष्ट्र.
मारा गया पिता - पाण्डु.
मनोज बाज्पाई - दुर्योधन.
अजय देवगन - कर्ण.
अर्जुन रामपाल - युधिष्ठिर, भीम.
रणवीर कपूर - अर्जुन.
बरखा बिष्ट - कुन्ती.
नसीरुद्दीन शाह - सूर्य.
महाभारत से प्रेरित पटकथा में युद्ध का स्थान ले लिया है चुनाव ने.मुख्यमन्त्री की कुर्सी बनी राजगद्दी.महाभारत काल की तरह ही राज्य विस्तार के लिये विवाह का उपयोग हुआ.चीरहरण का स्थान ले लिया भावनात्मक उत्पीड़न ने.कर्ण पूर्व की भाँति शैशव अवस्था में नदी में बहा दिया गया और सूत पुत्र कहलाया.कालान्तर में उसने अपने मित्र दुर्योधन के साथ मिलकर अपने ही भाइयों का रक्तपात किया.कुन्ती,अभ्यर्थना के बावज़ूद फिर से कर्ण को पांडवों के खेमे में नहीं ला सकी.भीम ने गदा के स्थान पर बेसबाल के बल्ले से शत्रुओं का रक्त बहाया.मन्त्रोच्चारित बाणों की जगह ले ली रीमोट बमों ने.बड़ा बदलाव था कहानी के अन्त में द्रौपदी का राजगद्दी पर आसीन होना.
कहिये कि कहानी मौलिक थी..........
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